सवांस सवांस शिव को सुमरू शिव को सुमरु
शिव को सुमरु मैं शिव को सुमरु - टेक
१. गले में रहती सर्पों की माला
बाघम्बर है तन पर डाला
कर में है त्रिशूल और डमरू -------
२ सीस जटा से गंगा है बहती
चन्दा की सोभा मस्तक पर रहती
कानो में कुण्डल पाँव में घुँघरू
३ धूनी की भसम रमाए रहता
भांग का घूँट चढ़ाए रहता
बाम अंग माँ भवानी को ना बिसरू
४ बम - बम - बम - बम भोला
कृपा का भंडारा खोला
मैं भी झोली फैला के पसरू
"हरिओम" शिव का ध्यान हूँ धरता
ऊँ नम:शिवाय का मंत्र हुँ जपता
मैं शिव से होना चाहूँ रूबरू
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