Tuesday, November 18, 2014

Bhajan 5

सवांस सवांस शिव को सुमरू शिव को सुमरु 
शिव को सुमरु  मैं शिव को सुमरु  - टेक 
 १. गले में रहती सर्पों  की माला 
     बाघम्बर है  तन पर डाला 
     कर में है त्रिशूल और डमरू -------
२ सीस जटा  से गंगा है बहती 
   चन्दा की सोभा मस्तक पर रहती 
   कानो  में कुण्डल पाँव  में घुँघरू 
३ धूनी की भसम रमाए रहता 
   भांग का घूँट चढ़ाए  रहता 
   बाम  अंग माँ  भवानी  को ना बिसरू 
४ बम - बम - बम - बम  भोला 
   कृपा का भंडारा खोला 
   मैं भी झोली फैला  के पसरू 
  "हरिओम"  शिव का ध्यान हूँ  धरता 
   ऊँ  नम:शिवाय का मंत्र हुँ  जपता 
   मैं शिव से होना चाहूँ रूबरू 


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